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संसद ने G RAM G बिल को मंजूरी दी, MGNREGA की जगह सालाना 125 दिन का ग्रामीण रोजगार

Editor - Omprakash Najwani - Mera Samaj Merabharat
संसद ने गुरुवार को विकसित भारत गारंटी फॉर एम्प्लॉयमेंट एंड लाइवलीहुड मिशन (ग्रामीण) बिल, जिसे G RAM G कहा जा रहा है, को मंजूरी दे दी। इस कदम से दो दशक पुरानी MGNREGA योजना की जगह ली जाएगी और सालाना 125 दिन के ग्रामीण मजदूरी रोजगार का वादा किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस बदलाव का मकसद मौजूदा योजना की संरचनात्मक कमियों को दूर करना है।लोकसभा में पास होने के घंटों बाद राज्यसभा में भी बिल ध्वनि मत से पास कर दिया गया। दोनों सदनों में विपक्ष के कड़े विरोध के बीच यह कदम उठाया गया। विपक्ष ने MGNREGA से महात्मा गांधी का नाम हटाने और योजना का वित्तीय बोझ राज्यों पर डालने का आरोप लगाया। विरोध में कई सांसदों ने कागज़ फाड़े, नारेबाज़ी की और वॉकआउट किया। संसद परिसर में विपक्षी पार्टियों ने धरना भी दिया और देशव्यापी आंदोलन की योजना की घोषणा की।चौहान ने बिल का बचाव करते हुए कहा कि यह रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और राष्ट्रीय प्रगति के लिए जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नाम का राजनीतिक फ़ायदे के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि मूल ग्रामीण रोज़गार योजना 2005 में शुरू हुई थी और 2009 में कांग्रेस ने चुनावी फ़ायदे के लिए गांधी का नाम जोड़ दिया।नए कानून के तहत ग्रामीण मजदूरों को सालाना 125 दिन का रोजगार, तय काम का शेड्यूल और समय पर डिजिटल मजदूरी का भुगतान मिलेगा। अगर मांग के 15 दिनों के अंदर काम नहीं दिया जाता है, तो राज्यों को बेरोज़गारी भत्ता देना होगा। किसानों को बेहतर सिंचाई, पानी बचाने, स्टोरेज और कनेक्टिविटी सुविधाओं के साथ-साथ मौसम के दौरान मजदूरों की कमी से सुरक्षा का लाभ मिलेगा। सरकार का कहना है कि नया फ्रेमवर्क ग्रामीण रोजगार को सिर्फ़ सुरक्षा कवच नहीं बल्कि विकास के साधन के रूप में स्थापित करेगा, जल संरक्षण, मुख्य ग्रामीण और आजीविका इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु लचीलेपन को जोड़कर। यह कदम विकसित भारत 2047 के लॉन्ग-टर्म विज़न के अनुरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने का प्रयास है।
19-December-2025 || Mera Samaj Merabharat
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