logo

समझदार व्यक्ति चीजों को समझ जाता है: मुनि आदित्यसागर का धर्म संदेश

Editor - Omprakash Najwani - Mera Samaj Merabharat
मदनगंज किशनगढ़, 17 दिसंबर। श्रुतसंवेगी महाश्रमण मुनि आदित्यसागर ने बुधवार को सिटी रोड स्थित जैन भवन में प्रातः धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के इस पावन और पुनीत शासन में हम सभी विराजते हैं। तीर्थंकर जिनेंद्र भगवान की पियूष देशना हम सभी मनुष्य के कल्याण का साधन है।मुनि आदित्यसागर ने कहा कि संसारी मनुष्य स्वयं को चतुर समझता है क्योंकि वह धन कमा लेता है, घर बना लेता है और परिवार पाल लेता है। लेकिन यदि वह अपने जीवन का वास्तविक उद्देश्य नहीं जानता, तो वह अभी भी नासमझ या मूर्ख ही है। उन्होंने कहा कि धर्म के सरल और सीधे लक्षणों को अपनाकर जीवन की अज्ञानता से बाहर निकला जा सकता है।उन्होंने मूर्ख के लक्षणों के बारे में बताया कि कुछ व्यक्ति जन्म से ही कर्मों के कारण बुद्धिहीन होते हैं, कुछ मध्यकाल में बुद्धिहीन हो जाते हैं, और कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनके पास ज्यादा बुद्धि होती है, लेकिन वे उसे हजम नहीं कर पाते, ऐसे लोग भी मूर्खों की श्रेणी में आते हैं। मुनि आदित्यसागर ने कहा कि व्यक्ति अपने कर्म और क्रिया से ही मूर्ख या ज्ञानी बनता है। मूर्खों की संगति अज्ञानता को बढ़ाती है और विद्वान भी मूर्ख के संग अज्ञानता प्राप्त कर सकते हैं।उन्होंने सांप का उदाहरण देकर समझाया कि जैसे सांप को जबरदस्ती दूध पिलाया जाए तो दूध भी उसके लिए जहर बन जाता है, वैसे ही मूर्ख संगति भी व्यक्ति को प्रभावित करती है। मुनि आदित्यसागर ने कहा कि धर्म के ऊपर तर्क नहीं करना चाहिए। हिंसा के प्रति झुकाव वाला, हर्ट बुद्धि वाला या जो सही बात नहीं समझे, वह मूर्ख है।सभा में चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी विमल कुमार प्रेमचंद अक्षत दिव्यम बड़जात्या परिवार मरवा वाले को प्राप्त हुआ। मंगलाचरण सुशील पाटनी ने भजन प्रस्तुत किए। सायंकालीन श्रुत-समाधान एवं आरती भी संपन्न हुई। इस दौरान पंचायत अध्यक्ष विनोद पाटनी, चेतन प्रकाश पांडया, बाबू गदिया, मांगीलाल झांझरी, विमल पापल्या, पिंटू पाटनी, पारसमल पांडया, लूणकरण कासलीवाल, कमल बैंद, विकास पाटनी, सुनील काला, राजू लुहाड़िया, महेश कासलीवाल सहित अनेक समाज बंधु उपस्थित रहे।
17-December-2025 || Mera Samaj Merabharat
https://merasamajmerabharat.com/news/detail/11404