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सरसों की फसल को कीट-रोगों से सुरक्षित रखने पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

Editor : Omprakash Najwani - Aagaj Ki Aawaj
अजमेर, 10 दिसम्बर। सरसों की फसल को कीटों एवं रोगों से बचाने के लिए किसानों को विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया गया।गृह परीक्षण केन्द्र तबीजी फार्म अजमेर के उपनिदेशक कृषि (शस्य) मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि सरसों फसल में उत्पादकता बढ़ाने के लिए झुलसा, तुलासिता, सफेद रोली जैसे रोगों तथा एफिड (माहु/चैंपा) जैसे कीटों से बचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि छिड़काव करते समय पूरे कपड़े, चश्मा, मास्क और दस्तानों का उपयोग अवश्य करना चाहिए।कृषि अनुसंधान अधिकारी (पौध व्याधि) जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि सरसों की फसल में सफेद रोली, झुलसा एवं तुलासिता रोग दिखाई देने पर बुवाई के 45, 60 और 75 दिन बाद कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या मैन्कोजेब का छिड़काव करना चाहिए। प्रथम छिड़काव में दवा की मात्रा 1.4 किलो तथा दूसरे और तीसरे छिड़काव में 2 किलो प्रति हैक्टेयर के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव किया जाए। उन्होंने कहा कि बुवाई के 45–60 दिन बाद या रोग के लक्षण दिखाई देते ही मैटेलेक्जिल 8 प्रतिशत के साथ मैन्कोजेब 64 प्रतिशत डब्ल्यूपी कवकनाशी का 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें और आवश्यकता अनुसार 15 दिन बाद पुनः छिड़काव दोहराएं। सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी (कीट) सुरेश चौधरी ने बताया कि सरसों की फसल में हीरकतितली और एफिड से बचाव के लिए मैलाथियान 50 ईसी सवा लीटर या डायमिथोएट 30 ईसी 875 मिलीलीटर या क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी 600 मिलीलीटर तथा थायोमैथोक्जाम 25 डब्ल्यूजी 100–125 ग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से पानी में मिलाकर छिड़काव करें और आवश्यकता अनुसार 10–15 दिन बाद छिड़काव दोहराएं।

10-December-2025 || Aagaj Ki Aawaj
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