राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भुवनेश्वर में ओडिशा विधानसभा के सदस्यों को संबोधित करते हुए अपने विधायक और मंत्री कार्यकाल की यादें ताज़ा कीं। उन्होंने कहा कि कई वर्षों बाद इस सदन में लौटकर पुरानी स्मृतियाँ फिर जाग उठी हैं। उन्होंने याद किया कि एक विधायक के रूप में वे इसी सदन में प्रश्न पूछती थीं और मंत्री रहते हुए उन्हीं प्रश्नों के उत्तर देती थीं। मुर्मू ने 2000 से 2009 तक रायरंगपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और 2000 से 2004 तक ओडिशा सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहीं।अपने संबोधन में द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ओडिशा ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह वह धरती है जहाँ चंदाशोक का धर्मशोक में परिवर्तन हुआ। उन्होंने कहा कि ओडिशा के आदिवासी समुदायों ने विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष कर देश के लिए मिसाल पेश की है।राष्ट्रपति ने ओडिशा में महिला सशक्तिकरण की प्राचीन परंपरा पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ओडिशा विधानसभा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का एक लंबा इतिहास रहा है और आज़ादी से पहले व बाद में ऐसा कोई समय नहीं रहा जब महिलाओं की उपस्थिति सदन में न रही हो। उन्होंने कहा कि ओडिशा की महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर देश को गौरवान्वित किया है।द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ओडिशा विधानसभा ने जनकल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण कानून पारित किए हैं। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि 17वीं विधानसभा ने कम समय में सार्थक बैठकों की एक प्रभावी परंपरा स्थापित की है। उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, जनजातीय और वंचित समूहों के विकास, आवास तथा आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में राज्य सरकार की नई पहलों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से ओडिशा में औद्योगीकरण की नई प्रक्रिया शुरू हुई है, जो राज्य की तीव्र प्रगति को दिशा दे रही है। द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि प्रकृति ने ओडिशा को अपार संपदाओं से नवाज़ा है और राज्य इन संसाधनों के संतुलित उपयोग से विकास की नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।