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मणिपुर में सामाजिक सद्भाव और सत्य आधारित समझ की आवश्यकता पर मोहन भागवत का जोर

Editor - Omprakash Najwani - Aagaj Ki Aawaj
इम्फाल। आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने मणिपुर की तीन दिवसीय यात्रा के पहले दिन आयोजित गणमान्य व्यक्तियों की सभा को संबोधित करते हुए सामाजिक सद्भाव, सभ्यतागत एकता और दीर्घकालिक शांति पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका, इसके खिलाफ फैलने वाले दुष्प्रचार और सत्य आधारित समझ की आवश्यकता को रेखांकित किया।आधिकारिक बयान के अनुसार, भागवत ने कहा कि आरएसएस देश भर में लगातार चर्चा का विषय रहता है, जिसमें धारणाओं और दुष्प्रचार का प्रभाव अधिक देखने को मिलता है। उन्होंने संघ के कार्यों को अद्वितीय बताते हुए कहा कि इसकी तुलना किसी संगठन से नहीं की जा सकती, जैसे समुद्र, आकाश और महासागर की कोई तुलना नहीं होती। उन्होंने कहा कि आरएसएस का विकास स्वाभाविक है और इसकी कार्यप्रणाली स्थापना के 14 वर्षों बाद ही स्पष्ट हो गई थी। इसे समझने के लिए शाखा जाना आवश्यक है।भागवत ने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य पूरे हिंदू समाज को संगठित करना है, जिसमें संघ का विरोध करने वाले भी शामिल हैं। यह समाज के भीतर किसी शक्ति केंद्र का निर्माण नहीं करता। उन्होंने बताया कि संघ के खिलाफ गलत सूचना अभियान 1932-33 में ही शुरू हो चुके थे, जिनमें भारत के बाहर के स्रोत भी शामिल थे, जिन्हें भारतीय सभ्यतागत लोकाचार की समझ नहीं थी। उन्होंने कहा कि संगठन को धारणाओं के बजाय सत्य के आधार पर समझना चाहिए। आरएसएस संस्थापक केबी हेडगेवार को याद करते हुए भागवत ने उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों, देशभक्ति और स्वतंत्रता संग्राम की विभिन्न धाराओं में सक्रिय भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हेडगेवार ने एक संगठित, गुणात्मक रूप से बेहतर समाज की आवश्यकता को महसूस कर संघ की स्थापना की। भागवत ने कहा कि संघ एक मानव-निर्माण पद्धति है और “हिंदू” शब्द धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक व सभ्यतागत विशेषण है।

21-November-2025 || Aagaj Ki Aawaj
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