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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) द्वारा आयोजित विदाई समारोह में मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि उनके 41 वर्ष के लंबे करियर का सबसे बड़ा सौभाग्य यह रहा कि उन्होंने उस समय भारतीय न्यायपालिका का नेतृत्व किया, जब देश संविधान के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा था। उन्होंने इसे अपने जीवन का विशेष गौरवपूर्ण क्षण बताया।मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उनका न्यायिक मार्गदर्शन हमेशा संविधान की उस भावना से प्रेरित रहा है, जिसे डॉ. बीआर अंबेडकर ने ‘विकसित होती दस्तावेज़’ के रूप में परिभाषित किया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देते हुए, मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की।अपने पिता और डॉ. अंबेडकर के विचारों से मिली प्रेरणा का उल्लेख करते हुए गवई भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि उनकी आवाज़ भावनाओं से भरी है, लेकिन यह सफ़र बेहद संतोषजनक रहा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि न्यायाधीश का पद शक्ति नहीं, बल्कि कर्तव्य का स्थान है और इसे विनम्रता के साथ निभाना चाहिए।मुख्य न्यायाधीश मनोनीत सूर्यकांत ने गवई के नेतृत्व को श्रद्धांजलि दी और उनकी आवाज़ को “स्पष्ट, सिद्धांतबद्ध और निर्णायक” बताया। उन्होंने कहा कि गवई का कार्यकाल न्यायपालिका की मजबूती और संवैधानिक आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।
गवई ने अपने संबोधन में सुप्रीम कोर्ट संस्था की सामूहिक भूमिका को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि फैसलों में जजों के साथ बार, रजिस्ट्री और कर्मचारी भी समान रूप से भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और SCAORA के मुद्दों को हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए, क्योंकि न्याय की प्रक्रिया इन सभी के सहयोग से आगे बढ़ती है।
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