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राज्यपाल बोले– सुप्रीम कोर्ट ने शक्तियों के पृथक्करण को किया स्पष्ट, मुख्यमंत्री ही सरकार का वास्तविक चेहरा

Editor - Omprakash Najwani - Aagaj Ki Aawaj
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश ने यह संदेश दिया है कि भारत का संविधान शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को पूरी मजबूती से बरकरार रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालतें राष्ट्रपति और राज्यपालों द्वारा विधानमंडल से पारित विधेयकों को मंज़ूरी देने के लिए समय-सीमा निर्धारित नहीं कर सकतीं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि राज्यपाल फाइलों को अनिश्चित काल तक लंबित रखें। राज्यपाल ने कहा कि निर्वाचित मुख्यमंत्री सरकार का असली चेहरा होते हैं, न कि मनोनीत राज्यपाल।राज्यपाल ने एएनआई से बातचीत में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय राज्यपाल और मुख्यमंत्री की संवैधानिक सीमाओं को रेखांकित करता है और यह संदेश देता है कि दोनों पदों को आपसी सहयोग और संवैधानिक मर्यादा में रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान ने प्रत्येक पद के लिए 'लक्ष्म रेखाएँ' तय कर रखी हैं, जिन्हें पार किए बिना मिलकर काम करना संवैधानिक प्रणाली को मजबूत करता है।यह टिप्पणी उस निर्णय के बाद आई है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने कहा कि अदालतें राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए समय-सीमा तय नहीं कर सकतीं। हालांकि, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यपाल विधेयकों को मंज़ूरी देने से अनिश्चित काल तक इनकार नहीं कर सकते और उन्हें अपने संदेह या आपत्तियों को दूर करने के लिए राज्य विधानमंडल से संवाद करना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भेजे गए 13 प्रश्नों पर अपनी सलाह देते हुए पीठ ने यह राय रखी। सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, यह व्यवस्था शक्तियों के संतुलन और संवैधानिक प्रक्रिया के सम्मान को सुनिश्चित करती है।
21-November-2025 || Aagaj Ki Aawaj
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