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नई दिल्ली, 12 नवम्बर। दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद को उस विज्ञापन के प्रसारण से रोक दिया है, जिसमें अन्य च्यवनप्राश ब्रांडों को ‘धोखा’ बताया गया था। अदालत ने पतंजलि आयुर्वेद को निर्देश दिया है कि वह तीन दिन के भीतर सभी इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट माध्यमों से यह विज्ञापन हटा दे।हाई कोर्ट ने कहा कि विज्ञापन के जरिए यह संदेश देना कि सिर्फ पतंजलि का ही प्रोडक्ट असली है और बाकी सभी धोखा हैं, गलत है और इससे सामान्य तौर पर च्यवनप्राश की पूरी श्रेणी बदनाम होती है।जस्टिस तेजस करिया ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अगर आयुर्वेदिक उत्पाद का निर्माण कानून और उसमें दर्ज नियमों के अनुसार करता है, तो उसके उत्पाद को भ्रामक बताकर बदनाम नहीं किया जा सकता, जब कानून उसे एक अच्छी और स्वीकार्य आयुर्वेदिक औषधि मानता है।डाबर इंडिया पतंजलि द्वारा जारी किए गए 25 सेकंड के विज्ञापन से व्यथित था, जिसका शीर्षक था — “51 जड़ी-बूटियाँ। 1 सत्य। पतंजलि च्यवनप्राश!” इस विज्ञापन में एक महिला अपने बच्चे को च्यवनप्राश खिलाते हुए कहती है, “चलो धोखा खाओ।” इसके बाद रामदेव कहते हैं, “अधिकांश लोग च्यवनप्राश के नाम पर धोखा खा रहे हैं।”
उच्च न्यायालय ने कहा कि यह विज्ञापन एक आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन, अर्थात च्यवनप्राश से संबंधित है और योग एवं वैदिक प्रथाओं के जाने-माने विशेषज्ञ रामदेव द्वारा प्रस्तुत यह विज्ञापन एक सामान्य दर्शक पर यह गहरी छाप छोड़ सकता है कि केवल पतंजलि का उत्पाद ही असली च्यवनप्राश है।
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