केवड़िया/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ परिसर में आयोजित परेड में कहा कि “कांग्रेस की गलती का खामियाजा देश ने दशकों तक भुगता।” यह टिप्पणी एक ऐतिहासिक आलोचना के साथ-साथ वर्तमान राजनीतिक विमर्श की दिशा भी तय करती दिखी। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल पूरे कश्मीर का भारत में विलय चाहते थे, लेकिन नेहरू ने इसकी अनुमति नहीं दी।प्रधानमंत्री ने कहा कि 31 अक्टूबर का दिन केवल राष्ट्रीय एकता दिवस का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उस विचारधारा के पुनर्स्थापन का क्षण भी है जिसने स्वतंत्र भारत के स्वरूप को गढ़ा था। गुजरात के एकता नगर में सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए मोदी ने कहा कि “हमने 2014 से नक्सलवाद और माओवाद पर निर्णायक प्रहार किया है और अब घुसपैठ के खिलाफ अंतिम लड़ाई लड़ेंगे।”इस वर्ष का राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह गणतंत्र दिवस परेड की तर्ज पर आयोजित किया गया। इसमें महिला अधिकारियों की कमान में अर्द्धसैनिक टुकड़ियाँ शामिल रहीं। बीएसएफ और सीआरपीएफ के वीरता पदक विजेताओं का सम्मान और भारतीय नस्ल के श्वानों का प्रदर्शन इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। प्रधानमंत्री द्वारा दिलाई गई “एकता की शपथ” ने इस आयोजन को जनभागीदारी का स्वरूप दिया।वहीं दिल्ली में आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाकर सरदार पटेल के अधूरे कार्य को पूरा किया।” शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पटेल को वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे अधिकारी थे और भारत रत्न देने में 41 वर्ष की देरी की। उन्होंने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को “देशी इंजीनियरिंग का चमत्कार” बताते हुए कहा कि 25,000 टन लोहे और 1,700 टन कांसे से निर्मित यह स्मारक अब तक 2.5 करोड़ से अधिक पर्यटकों को आकर्षित कर चुका है।मोदी ने कहा कि 182 मीटर ऊँची ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और ऐतिहासिक पुनर्पाठ का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज का भारत सरदार पटेल के उस दृष्टिकोण को साकार कर रहा है जिसमें एकता, सुरक्षा और आत्मगौरव की त्रयी निहित है।
केवड़िया से लेकर दिल्ली तक एक ही संदेश गूंजा— “विभिन्नता में एकता नहीं, बल्कि एकता में विविधता ही भारत की वास्तविक शक्ति है।”