नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि अब युद्ध आमने-सामने नहीं, बल्कि गैर-गतिज और गैर-संपर्क तरीके से लड़े जा रहे हैं। इस बदलते परिदृश्य के लिए सैन्य शक्ति, बौद्धिक कौशल और नैतिक तैयारी की आवश्यकता पर बल दिया गया। उन्होंने युवाओं को थिंक टैंक और युद्धक्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि युद्ध के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अब ये आमने-सामने नहीं लड़े जाते, इसलिए इनका सामना करने के लिए सैन्य शक्ति, बौद्धिक क्षमता और न्यायसंगत तैयारी आवश्यक है।केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने भी सेना और रक्षा थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज’ द्वारा आयोजित ‘चाणक्य डिफेंस डायलॉग: यंग लीडर्स फोरम’ में सैन्य अधिकारियों, छात्रों और रक्षा विशेषज्ञों को संबोधित किया। सेना प्रमुख ने अपने भाषण में युद्ध की बदलती प्रकृति और इस परिदृश्य में आवश्यक तैयारी पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘‘युद्ध में भाग-दौड़ अब नहीं होती और यह संपर्क-रहित होता जा रहा है,’’ इसलिए इसका सामना करने के लिए सैन्य शक्ति, बौद्धिक कौशल और न्यायसंगत तैयारी की आवश्यकता है।
ऑपरेशन सिंदूर पर मीडिया ब्रीफिंग में शामिल कर्नल सोफिया कुरैशी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थीं। कार्यक्रम में यह भी घोषणा की गई कि ‘चाणक्य रक्षा संवाद 2025’ आगामी 27-28 नवंबर को आयोजित किया जाएगा, जिसका विषय होगा ‘‘सुधार से परिवर्तन: सशक्त और सुरक्षित भारत’’।