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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मेनका गांधी ने जताई आपत्ति, कहा– ‘आवारा कुत्तों को हटाना अव्यावहारिक’

:: Editor - Omprakash Najwani :: 07-Nov-2025
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टॉप सहित सभी सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश के बाद भाजपा नेता और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त पशु आश्रय स्थलों की कमी के चलते इस आदेश को अमल में लाना संभव नहीं है।

मेनका गांधी ने कहा कि यह निर्णय अव्यावहारिक है और इसे लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “अगर 5000 कुत्तों को हटा भी दिया जाए, तो उन्हें कहाँ रखा जाएगा? इसके लिए कम से कम 50 आश्रय स्थलों की आवश्यकता है, लेकिन इतने आश्रय गृह हैं ही नहीं। जब देश में करीब 8 लाख कुत्ते हैं, तो 5000 को हटाने से क्या फर्क पड़ेगा?” उन्होंने कहा कि यह फैसला न्यायमूर्ति पारदीवाला के पिछले फैसले जितना ही बुरा है या उससे भी बदतर।

सुप्रीम कोर्ट की वकील और याचिकाकर्ता ननिता शर्मा ने कहा कि आज का आदेश 11 अगस्त के पिछले आदेश जैसा ही है। सरकारी संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टॉप से कुत्तों को हटाकर उनका पुनर्वास किया जाएगा। इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा ताकि वे दोबारा इन संस्थानों में न लौटें। शर्मा ने कहा कि एबीसी (पशु जन्म नियंत्रण) नियमों के तहत पुनर्वास वर्जित है, लेकिन इसे काटने के मामलों के आधार पर उचित ठहराया गया है।

पीपुल्स फॉर एनिमल्स इंडिया की ट्रस्टी गौरी मौलेखी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि पीठ ने किसी भी पक्ष को नहीं सुना और यह एक “दुर्भाग्यपूर्ण फैसला” है। उन्होंने कहा कि ऐसे बेज़ुबान जानवरों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।


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