चिराग पासवान का 43वां जन्मदिन आज, राजनीति में तेजी से बनाया अलग मुकाम
नई दिल्ली। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान आज यानी 31 अक्तूबर को अपना 43वां जन्मदिन मना रहे हैं। बिहार के सियासी पटल पर तेजी से उभरते नेताओं में चिराग पासवान का नाम शामिल है। उन्होंने बहुत कम समय में राजनीतिक गलियारों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
दिल्ली में 31 अक्तूबर 1982 को जन्मे चिराग पासवान, दिवंगत नेता रामविलास पासवान के पुत्र हैं। उन्होंने दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और प्रारंभिक तौर पर फिल्मी दुनिया में करियर बनाने का प्रयास किया। वर्ष 2011 में अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ फिल्म ‘मिले ना मिले हम’ से उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही।
पहली फिल्म फ्लॉप होने के बाद चिराग पासवान ने अपने पिता के साथ राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2014 में उन्होंने जमुई लोकसभा सीट से लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और बड़ी जीत हासिल की। उन्होंने सुधांशु शेखर भास्कर को 85 हजार से अधिक मतों से हराया। वर्ष 2019 में भी उन्होंने इसी सीट पर अपनी जीत दोहराई।
रामविलास पासवान के निधन के बाद वर्ष 2021 में चिराग का अपने चाचा पशुपति कुमार पारस से विवाद हुआ। 14 जून 2021 को पारस ने खुद को लोकसभा में लोजपा का नेता घोषित किया, जिसके बाद चिराग ने अपने चाचा सहित पांच बागी सांसदों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान ने हाजीपुर सीट से 1.70 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में मंत्री के रूप में शपथ ली। राजनीति के साथ-साथ चिराग सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं। वह ‘चिराग का रोजगार’ नामक एनजीओ का संचालन करते हैं, जो बिहार के बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का कार्य करता है।
Latest News
