महागठबंधन में सीट बंटवारे पर फूटा असंतोष, 12 सीटों पर सहयोगी दल आमने-सामने
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर असहमति गहराने से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। राजद, कांग्रेस, वीआईपी और सीपीआई सहित सहयोगी दल 12 सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए हैं, जिससे विपक्षी वोटों के बंटवारे की संभावना बढ़ गई है और इसका सीधा लाभ एनडीए को मिल सकता है।
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए सोमवार को नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के साथ ही एनडीए और महागठबंधन दोनों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि, सीट बंटवारे पर सहमति न बन पाने के कारण महागठबंधन के कई सहयोगी दलों के बीच सीधी टक्कर तय हो गई है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) वैशाली, सुल्तानगंज और बछवाड़ा सहित 12 सीटों पर आमने-सामने हैं। ये सीटें हैं—
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बछवाड़ा: अबदेश कुमार राय (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) बनाम शिव प्रकाश गरीब दास (कांग्रेस)
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नरकटियागंज: दीपक यादव (राष्ट्रीय जनता दल) बनाम शाश्वत केदार पांडे (कांग्रेस)
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बाबूबरही: बिंदु गुलाब यादव (विकासशील इंसान पार्टी) बनाम अरुण कुमार सिंह कुशवाहा (राष्ट्रीय जनता दल)
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वैशाली: संजीव सिंह (कांग्रेस) बनाम अजय कुमार कुशवाहा (राष्ट्रीय जनता दल)
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राजा पाकर: प्रतिमा कुमारी दास (कांग्रेस) बनाम मोहित पासवान (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी)
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कहलगांव: रजनीश भारती (राष्ट्रीय जनता दल) बनाम प्रवीण सिंह कुशवाहा (कांग्रेस)
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बिहारशरीफ: ओमैर खान (कांग्रेस) बनाम शिव कुमार यादव (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी)
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सिकंदरा: विनोद कुमार चौधरी (कांग्रेस) बनाम उदय नारायण चौधरी (राष्ट्रीय जनता दल)
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चैनपुर: बाल गोविंद बिंद (विकासशील इंसान पार्टी) बनाम बृज किशोर बिंद (राष्ट्रीय जनता दल)
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सुल्तानगंज: ललन कुमार (कांग्रेस) बनाम चंदन कुमार सिन्हा (राष्ट्रीय जनता दल)
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करगहर: संतोष कुमार मिश्रा (कांग्रेस) बनाम महेंद्र प्रसाद गुप्ता (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी)
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वारसलीगंज: अनिता देवी महतो (राष्ट्रीय जनता दल) बनाम सतीश कुमार (कांग्रेस)
कथित तौर पर, कांग्रेस ने कम से कम 70 सीटों की मांग की थी, जबकि राजद ने उसे 52 से 55 सीटों की पेशकश की। इसी तरह वाम दलों ने 40 सीटों की मांग की थी, जबकी 2020 के चुनाव में भाकपा (माले) लिबरेशन, भाकपा और भाकपा (मार्क्सवादी) ने क्रमशः 12, 2 और 2 सीटें जीती थीं। मुकेश सहनी की वीआईपी ने भी 40 सीटों की मांग की थी, लेकिन अंततः 15 सीटों पर समझौता हुआ। बताया जा रहा है कि वीआईपी को 2025 के चुनाव में जीत की स्थिति में उपमुख्यमंत्री पद देने का वादा किया गया है।
महागठबंधन के सहयोगी दलों द्वारा 12 सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारने से यह माना जा रहा है कि इससे सत्तारूढ़ एनडीए को फायदा होगा, क्योंकि विपक्षी वोटों का बंटवारा तय है। 23 अक्टूबर उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की अंतिम तिथि है, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
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