प्रधानमंत्री मोदी ने INS विक्रांत पर जवानों संग मनाई दिवाली, बताया आत्मनिर्भर भारत की शक्ति का प्रतीक
गोवा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गोवा और कारवार तट पर देश के स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर भारतीय नौसेना के जवानों के साथ दिवाली मनाई। जवानों के साथ दिवाली मनाने की अपनी परंपरा को जारी रखते हुए प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा की सराहना की और INS विक्रांत को भारत की शक्ति तथा आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने जहाज पर मौजूद अधिकारियों और नौसैनिकों को संबोधित करते हुए कहा, “आज एक तरफ मेरे पास अनंत क्षितिज, अनंत आकाश है, और दूसरी तरफ भारत की शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक INS विक्रांत है।” उन्होंने कहा कि वे भाग्यशाली हैं कि इस बार नौसेना के वीर जवानों के बीच दिवाली का पावन पर्व मना रहे हैं।
मोदी ने सैनिकों से बातचीत में कहा कि उन्हें नौसेना कर्मियों के साथ प्रकाश पर्व मनाने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने कहा, “समुद्र के पानी पर सूर्य की किरणों की चमक बहादुर सैनिकों द्वारा जलाए गए दिवाली के दीयों जैसी है।” प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना की सराहना करते हुए कहा कि वह देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को सशक्त बना रही है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को बल देता है।
262 मीटर लंबे INS विक्रांत का पूर्ण विस्थापन लगभग 45,000 टन है। यह चार गैस टर्बाइनों द्वारा संचालित है जिनकी कुल क्षमता 88 मेगावाट है और अधिकतम गति 28 नॉट है। लगभग 20,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह परियोजना रक्षा मंत्रालय और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) के बीच तीन चरणों में संपन्न हुई। फरवरी 2009 में इसकी कील रखी गई और अगस्त 2013 में शुभारंभ हुआ।
INS विक्रांत में 76 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सशक्त उदाहरण है। इसके साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास स्वदेशी रूप से विमानवाहक पोत डिजाइन और निर्माण करने की क्षमता है।
यह जहाज 30 विमानों वाले एयर विंग को संचालित करने में सक्षम है, जिसमें MIG-29K लड़ाकू जेट, कामोव-31, MH-60R हेलीकॉप्टर, स्वदेशी उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (ALH) और हल्के लड़ाकू विमान (LCA) (नौसेना) शामिल हैं।
पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने कच्छ में भारत-पाक सीमा के पास सशस्त्र बलों के साथ दिवाली मनाई थी। दिवाली पांच दिवसीय त्योहार है जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक मनाया जाता है और समृद्धि, प्रकाश और भाईचारे का प्रतीक है।
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